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Desi Nice Big Tits Bhabhi Captured Her Video (Must See)

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माया मेम साब

बाथरूम की ओर जाते समय पीछे से उसके भारी और गोल मटोल नितम्बों की थिरकन देख कर तो मेरे दिल पर छुर्रियाँ ही चलने लगी। मैं जानता था पंजाबी लड़कियाँ गाण्ड भी बड़े प्यार से मरवा लेती हैं। और वैसे भी आजकल की लड़कियाँ शादी से पहले चूत मरवाने से तो परहेज करती हैं पर गाण्ड मरवाने के लिए अक्सर राज़ी हो जाती हैं। आप तो जानते ही हैं मैं गाण्ड मारने का कितना शौक़ीन हूँ। बस मधु ही मेरी इस इच्छा को पूरी नहीं करती थी बाकी तो मैंने जितनी भी लड़कियों या औरतों को चोदा है उनकी गाण्ड भी जरूर मारी है। इतनी खूबसूरत सांचे में ढली मांसल गाण्ड तो मैंने आज तक नहीं देखी थी। काश यह भी आज राज़ी हो जाए तो कसम से मैं तो इसकी जिन्दगी भर के लिए गुलामी ही कर लूं।

इसी कहानी से......

हमारी शादी को 4-5 महीने होने को आये थे और हम लगभग रोज़ ही मधुर मिलन (चुदाई) का आनंद लिया करते थे। मैंने मधुर को लगभग हर आसन में और घर के हर कोने में जी भर कर चोदा था। पता नहीं हम दोनों ने कामशास्त्र के कितने ही नए अध्याय लिखे होंगे। पर सच कहूं तो चुदाई से हम दोनों का ही मन नहीं भरा था। कई बार तो रात को मेरी बाहों में आते ही मधुर इतनी चुलबुली हो जाया करती थी कि मैं रति पूर्व क्रीड़ा भी बहुत ही कम कर पाता था और झट से अपना पप्पू उसकी लाडो में डाल कर प्रेम युद्ध शुरू कर दिया करता था।

एक बात आपको और बताना चाहूँगा। मधुर ने तो मुझे दूध पीने और शहद चाटने की ऐसी आदत डाल दी है कि उसके बिना तो अब मुझे नींद ही नहीं आती। और मधुर भी मलाई खाने की बहुत बड़ी शौक़ीन बन गई है। आप नहीं समझे ना ? चलो मैं विस्तार से समझाता हूँ :

हमारा दाम्पत्य जीवन (चुदाई अभियान) वैसे तो बहुत अच्छा चल रहा था पर मधु व्रत त्योहारों के चक्कर में बहुत पड़ी रहती है। आये दिन कोई न कोई व्रत रखती ही रहती है। ख़ास कर शुक्र और मंगलवार का व्रत तो वो जरूर रखती है। उसका मानना है कि इस व्रत से पति का शुक्र गृह शक्तिशाली रहता है। पर दिक्कत यह है कि उस रात वो मुझे कुछ भी नहीं करने देती। ना तो वो खुद मलाई खाती है और ना ही मुझे दूध पीने या शहद चाटने देती है।

लेकिन शनिवार की सुबह वह जल्दी उठ कर नहा लेती है और फिर मुझे एक चुम्बन के साथ जगाती है। कई बार तो उसकी खुली जुल्फें मेरे चहरे पर किसी काली घटा की तरह बिखर जाती हैं और फिर मैं उसे बाँहों में इतनी जोर से भींच लेता हूँ कि उसकी कामुक चित्कार ही निकल जाती है और फिर मैं उसे बिना रगड़े नहीं मानता। वो तो बस कुनमुनाती सी रह जाती है। और फिर वो रात (शनिवार) तो हम दोनों के लिए ही अति विशिष्ट और प्रतीक्षित होती है। उस रात हम दोनों आपस में एक दूसरे के कामांगों पर शहद लगा कर इतना चूसते हैं कि मधु तो इस दौरान 2-3 बार झड़ जाया करती है और मेरा भी कई बार उसके मुँह में ही विसर्जित हो जाया करता है जिसे वो किसी अमृत की तरह गटक लेती है।

रविवार वाले दिन फिर हम दोनों साथ साथ नहाते हैं और फिर बाथरूम में भी खूब चूसा चुसाई के दौर के बाद एक बार फिर से गर्म पानी के फव्वारे के नीचे घंटों प्रेम मिलन करते रहते हैं। कई बार वो बाथटब में मेरी गोद में बैठ जाया करती है या फिर वो पानी की नल पकड़ कर या दीवाल के सहारे थोड़ी नीचे झुक कर अपने नितम्बों को थिरकाती रहती है और मैं उसके पीछे आकर उसे बाहों में भर लेता हूँ और फिर पप्पू और लाडो दोनों में महा संग्राम शुरू हो जाता है। उसके गोल मटोल नितम्बों के बीच उस भूरे छेद को खुलता बंद होता देख कर मेरा जी करता अपने पप्पू को उसमें ही ठोक दूँ। पर मैं उन पर सिवाय हाथ फिराने या नितम्बों पर चपत (हलकी थपकी) लगाने के कुछ नहीं कर पाता। पता नहीं उसे गाण्ड मरवाने के नाम से ही क्या चिढ़ थी कि मेरे बहुत मान मनोवल के बाद भी वो टस से मस नहीं होती थी। एक बात जब मैंने बहुत जोर दिया तो उसने तो मुझे यहाँ तक चेतावनी दे डाली थी कि अगर अब मैंने दुबारा उसे इस बारे में कहा तो वो मुझ से तलाक ही ले लेगी।

मेरा दिल्ली वाला दोस्त सत्य जीत तो अक्सर मुझे उकसाता रहता था कि गुरु किसी दिन उल्टा पटक कर रगड़ डालो। शुरू शुरू में सभी पत्नियाँ नखरे करती हैं वो भी एक बार ना नुकर करेगी फिर देखना वो तो इसकी इतनी दीवानी हो जायेगी कि रोज़ करने को कहने लगेगी।

ओह …यार जीत सभी की किस्मत तुम्हारे जैसी नहीं होती भाई।

बुआ हो तो ऐसी

घर की मौज हर किसी को नसीब नहीं होती पर शायद मैं इस मामले में खुशनसीब था जो मुझे वो सब मिला जो हर घर में हर किसी को नहीं मिलता। तब मैं गाँव में रहता था। दसवीं तक पढाई कर चुका था पर गाँव में दस से आगे का स्कूल नहीं था सो आगे की पढ़ाई के लिए शहर जाना पड़ा। शहर गाँव से करीब तीस किलोमीटर था। इसलिए घर वालों ने फैसला किया कि शहर में ही कमरा ले लिया जाए नहीं तो आने जाने में बहुत समय खराब होगा। मैं शहर में कमरा ढूंढने लगा। पर जब तक कमरा मिला तब तक जिंदगी में उथल पुथल हो गई।

मैं राज मुझे तो जानते ही हो आप लोग। मैं गाँव का हट्टा कट्टा नौजवान, कद 5 फुट 11 इंच, रंग गोरा, जिम तो नहीं जाता पर अपने शरीर का मैं पूरा ध्यान रखता हूँ। घर में माँ, पिता जी, दो बहनें, एक मुझ से एक साल छोटी, दूसरी तीन साल छोटी। गाँव में ज्यादातर संयुक्त परिवार होते हैं तो दादी और चाचा जी भी हमारे साथ ही रहते थे। चाचा करीब 25 साल के थे। कुछ दिनों के बाद ही उनकी शादी होने वाली थी। एक बुआ थी जिसकी दो साल पहले शादी हो चुकी थी।

अगर चरित्र की बात करें तो मेरे परिवार में सभी शरीफ थे। कभी भी किसी के बारे में मैंने घर या बाहर कोई गलत बात नहीं सुनी थी। मेरे मन में भी कभी परिवार के किसी सदस्य के बारे में कभी कोई गंदा विचार नहीं आया था। पर मानना है कि मेरे दादाजी भी जरुर चूत के रसिया रहे होंगे क्योंकि बेटी की उम्र का तो उनका पोता (मैं) था पर उम्र सुलभ मेरे दिमाग में भी सेक्स के कीड़े कुलबुलाने लगे थे। गाँव के लड़कियों को देख कर मेरा लंड जो करीब 7-8 इंच के करीब था और मोटा भी काफी था पजामे में तन कर खड़ा हो जाता था। गाँव में ज्यादातर खुला पाजामा या लूंगी ही पहनते थे तो लंड अक्सर उसमें तम्बू बना कर लेता था जिससे शर्म भी महसूस होती थी पर अपने लंबे और मोटे लंड को देख कर दिल में एक अजीब सी खुशी भी होती थी। खैर कहानी के असली मुद्दे पर आते हैं।

मैं शहर में कमरा तलाश कर रहा था। तभी बुआ का एक दिन फोन आया कि फूफा जी का तबादला उसी शहर में हो गया है जहां मैं पढ़ता हूँ। बुआ ने बताया कि उन्हें सरकारी मकान मिला है रहने के लिए जो बहुत बड़ा है। बुआ के कोई बच्चा तो था नहीं अभी तक सिर्फ बुआ और फूफा ही थे। बुआ बोली कि मुझे कमरा ढूंढने की कोई जरुरत नहीं है। मैं उनके पास रह सकता हूँ। पिता जी भी इसके लिए राजी हो गए क्योंकि इस से मेरे खाने पीने की समस्या का भी हल मिल गया था और बुआ-फूफा की निगरानी में मेरे बिगड़ने का भी डर नहीं था।

पिता जी ने फूफा से बात की तो उन्होंने भी हाँ कर दी। बस दो दिन के बाद फूफा सामान लेकर शहर पहुँच गए। मकान पर फूफा के ऑफिस के लोग आये थे फूफा से मिलने और सामान उतरवाने। करीब आधे घंटे में सब लोग सामान उतरवा कर और चाय पी कर चले गए। अब सामान जमाने का काम शुरू करना था। यह काम तो बुआ को ही करना था। मैं भी बुआ की मदद करने लगा। मैंने और बुआ ने मिल कर बड़ा-बड़ा सामान करीने से लगा दिया। अब कुछ छोटा मोटा सामान बचा था जो हर रोज़ काम आने वाला भी नहीं था। बुआ बोली कि इसे ऊपर टांड पर रख देते हैं।

तभी फूफा ने आवाज दी। जाकर देखा तो फूफा जी बोतल खोल कर बैठे थे और शायद एक दो पैग लगा भी चुके थे। वो कुछ खाने को मांग रहे थे। फूफा ने मुझे भी लेने को कहा पर मैंने मना कर दिया क्योंकि मैंने पहले कभी नहीं पी थी।

बुआ ने फूफा को काजू और नमकीन निकाल कर दी और हम फिर से काम पर लग गए। काम के दौरान हम दोनों ने एक दूसरे को कई बार छुआ पर ना तो मेरे मन में और ना ही बुआ के मन में कोई दूसरा ख़याल था। यानि सब कुछ सामान्य था। बुआ टांड पर चढ़ी हुई थी और मैं नीचे से सामान पकड़ा रहा था।

अचानक बुआ एकदम से चिल्लाई।

मैंने पूछा- क्या हुआ?

तो बुआ बोली कॉकरोच है। बुआ कॉकरोच से बहुत डरती थी।

मैंने ऊपर चढ़ कर देखा तो कॉकरोच ही था। मैंने कॉकरोच को मार कर नीचे फेंक दिया। बुआ अब भी बहुत डरी हुई थी। डर के मारे बुआ की आवाज भी नहीं निकल रही थी। जैसे ही मैंने कॉकरोच को मार कर नीचे फेंका बुआ एकदम मुझ से चिपक गई। बुआ डर के मारे कांप रही थी।

मैंने बुआ के कंधे पर हाथ रखा और बोला- बुआ अब कॉकरोच नहीं है, मैंने उसे मार कर फ़ेंक दिया है।

पर बुआ अब भी मुझ से चिपकी हुई कांप रही थी। मेरा हाथ बुआ की पीठ पर चला गया था। पर अब तक मेरे दिल में कोई भी ऐसी वैसी बात नहीं थी। अचानक मेरी नजर बुआ की चूचियों पर गई जो दिल की धड़कन के साथ ऊपर नीचे हो रही थी और अब मुझे अपने सीने में गड़ी हुई महसूस हो रही थी। मेरा लंड एक दम से पजामे में हरकत करने लगा था। पर मैं अपने आप पर कण्ट्रोल करने के पूरी कोशिश कर रहा था।

बुआ अब भी मुझसे चिपकी हुई थी। मैंने बुआ के चेहरे को आपने हाथ से ऊपर उठाया। बुआ की आँखें बंद थी। बुआ कितनी खूबसूरत थी इस बात का एहसास मुझे इसी पल हुआ था। मैंने कभी बुआ को इस नजर से देखा ही नहीं था। एक दम गोरा चिट्टा रंग, गुलाबी होंठ। इस पल तो मुझे बस यही नजर आ रहे थे। या फिर आपने सीने में गड़ती बुआ की मस्त बड़ी बड़ी चूचियाँ। बुआ की चूचियाँ बड़ी बड़ी थी। पर मुझे उसके नंबर का कोई अंदाजा नहीं था।

अब मुझे बुआ पर बहुत प्यार आ रहा था। बुआ के बदन के खुशबू और गर्मी ने मुझे दीवाना बना दिया था। अब मेरा आपने ऊपर कण्ट्रोल खत्म होता जा रहा था। बुआ का चेहरा मेरे करीब आता जा रहा था। ना जाने कब मेरे होंठ बुआ के होंठों से टकरा गए और मैं बुआ के रसीले होंठ अपने होंठो में दबा कर चूसने लगा। बुआ भी मेरा साथ देने लगी। एक दो मिनट तक ऐसे ही रहा। फिर बुआ जैसे अचानक नींद से जागी और उसने मुझे अपने से अलग कर दिया। बुआ नीचे मुँह किये हुए थी। मैं भी अपनी करनी पर शर्मिन्दा महसूस कर रहा था। मैं नीचे उतर गया। बुआ जब नीचे उतरने लगी तो बीच में ही लटक गई। बुआ ने मुझे मदद करने को कहा।

मैंने बुआ की टाँगें पकड़ ली और बुआ धीरे धीरे नीचे आने लगी। जैसे ही मेरे हाथ बुआ के गांड के पास पहुंचे मैंने बुआ के चूतड़ हल्के से दबा दिए। बुआ के मुँह से सिसकारी जैसी आवाज निकली मैं तो जैसे कहीं खो सा गया था।

बुआ बोली- अब ऐसे ही पकड़ कर खड़ा रहेगा या मुझे नीचे भी उतारेगा ?

मैं भी सपने से जगा और बुआ को नीचे उतारने लगा। जब बुआ मेरे बराबर आई तो बुआ की मस्त चूचियाँ बिलकुल मेरे मुँह के सामने थी। बुआ की उठती गिरती साँसों के साथ ऊपर नीचे होती चूचियों को देख कर मेरा तो दिमाग बिलकुल सुन्न हो गया।

मीना के साथ बिताये रंगीन पल

आज मैं जो आपको सुनाने जा रहा हूँ वो एक सच्ची कहानी है! यह घटना कुछ समय पहले की है जब हम कॉलेज़ में पढ़ते थे।

यह कहानी मेरी गर्लफ़्रेन्ड मीना की है, उसकी उम्र 21 साल है वो दिखने में बहुत सुन्दर है उसको देख कर किसी का भी लंड खड़ा हो सकता है। उसका फिगर 34-32-34 का है उसकी गांड तो बहुत मस्त है।

अब मैं अपनी कहानी पर आता हूँ।

मैं और मीना एक साथ कॉलेज में पढ़ते हैं। हमने साथ-साथ स्कूल की पढ़ाई भी की थी, हम एक साथ स्कूल-कॉलेज़ जाते हैं और एक साथ ही आते हैं! मैं उसको अच्छी नजरों से देखता था। मेरे मन में उसके प्रति कोई गलत सोच नहीं थी, पर एक दिन क्या हुआ कि बहुत जोर से बारिश हो रही थी और हम दोनों कॉलेज़ जा रहे थे, उसका बदन पूरा गीला हो गया था, वो भीगे कपड़ों में बहुत सुंदर लग रही थी। मेरा मन उसको देखते ही फिसल गया था।

उस रात को मैं सो नहीं पाया, बार बार मुझे उसका भीगा हुआ बदन याद आ रहा था और मैं सोच रहा था कि काश वो मुझे सेक्स करने दे। उस रात मैंने दो बार मुठ भी मारी और जैसे तैसे करके रात गुजर गई।

जब सुबह हम एक साथ कॉलेज़ जा रहे थे तो मैंने मीना को कहा कि मैं तुम्हें कुछ कहना चाहता हूँ।

उसने कहा- कहो !

पर मेरे मुँह से आवाज नहीं निकल रही थी, मैंने उसको कहा- कल बताऊँगा।

तो वो जिद करने लगी।

तो मैंने कहा- कॉलेज़ में बताऊँगा।

फिर उसने कहा- ठीक है !

जब हम कॉलेज़ पहुँच गए तो मेरा मन पढ़ने में बिल्कुल नहीं लगा और जैसे ही हाफ़ टाइम हुआ तो वो मेरे पास आ गई और बोली- क्या बात थी? अब बताओ।

तो मैंने उसको कहा- तुम अकेली कमरे में आओ !

जब हम दोनों एक कमरे मैं गए तो मैंने उसको कहा- मैं तुमसे प्यार करता हूँ !

तो उसने कहा- मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ !

इतना कहने पर मैंने उसका हाथ पकड़ कर कहा- मैं तुमसे सेक्स करना चाहता हूँ !

तो उसने कहा- सागर मैं तुम्हें ऐसा नहीं समझती थी !

फिर मैंने कहा- मीना जब कल तुम्हारे कपड़े भीग गए थे तो तुम्हारा बदन बहुत सुन्दर लग रहा था। मैं तब से ही तुम्हारे साथ सेक्स करने की सोच रहा हूँ। और कल रात को मुझे नींद भी नहीं आई। उसने कहा- देखो सागर, मैं तुमको एक अच्छा दोस्त मानती हूँ ! पर तुम तो !

इतना कह कर वो वहाँ से चली गई और मैं अपने कि कोसता रहा कि मैंने ये सब क्या किया।

फिर मैं निराश होकर वहाँ से घर चला गया। फिर दो दिन मैं कॉलेज़ नहीं गया तो दो दिन बाद उसका कॉल आया, उसने पूछा- तुम कॉलेज़ क्यों नहीं आ रहे हो?

मैंने कहा- तबियत ख़राब है !

मैं फिर से चुदी

हाय मैं मुक्ता ! गत कहानी में मैंने आपको अपने जीजू विपुल से अपनी धमाकेदार चुदाई के बारे में बताया था। जीजू तो मेरी चूत की सील तोड़कर चले गए थे लेकिन उसके बाद मेरी क्या हालत हुई वो मैं आपको बताती हूँ।

जब तक किसी लड़की की चुदाई नहीं होती, तब तक तो कोई बात नहीं, लेकिन लौड़ा खाने के बाद तो चूत हमेशा चाहती है कि कोई न कोई लौड़ा हमेशा उसमें घुसा रहे।

जीजू के जाने के बाद मैं हर मर्द को उसी नजरिये से देखने लगी, 18 साल का लोंडा हो या 50 साल का बुढ्ढा, मेरी निगाहें हमेशा उसकी कमर के नीचे होती, निगाहें तलाशती रहती कि इसका लौड़ा कैसा होगा, कितना लम्बा या मोटा होगा और अगर यह मेरी चूत में होता तो कैसा लगता।

घर में अगर आस पड़ोस के छोटे बच्चे आ जाते तो मैं उनकी छोटी सी लूली सहलाने लगती, उसको कभी जोर से दबा देती तो बच्चा रोने लगता। भगवन से दुआ करती- हे भगवन ! इसका लंड जल्दी से बड़ा कर दे ताकि मैं अपनी चूत की ज्वाला शांत कर सकूँ !

थोड़े दिनों में तो यह हाल हो गया कि मैं जब भी किसी मर्द को देखती तो काफी देर तक उसके लंड की जगह तकती रहती, मुझे लगने लगता कि मेरे देखने से इसका लौड़ा तन रहा है।

हालत जब बेकाबू होने लगे तो मैं अपने घर में ही राह देखने लगी। जीजी, मैं और हमसे छोटा हमारा भाई अभिषेक दोस्तों की तरह रहे थे। जीजी की शादी के बाद अभिषेक भी अपनी दुनिया में मस्त हो गया था। अभिषेक के घर से जाने के बाद में ही उसके कमरे की सफाई करती।

एक दिन जब मैं उसके कमरे की सफाई कर रही थी तो पलंग के नीचे मुझे उसके सफ़ेद रंग का जांघिया दिखा। मैंने उसको उठाया, न जाने मुझे क्या सूझी कि मैं जांघिए में वो जगह देखने लगी जहाँ लण्ड छुपा होता है। मुझे उस जगह कुछ दाग-धब्बे से नज़र आये। मैंने जांघिए को अपने नाकसे सूँघा। मैं क्या बताऊँ आपको ! उस खुशबू को सूंघते ही मैं तो मस्त हो गई, मेरा रोम-रोम उत्तेजना से भर गया, चूत गीली-गीली सी लगने लगी। मैंने एक हाथ से जांघिये को सूंघना जारी रखा और दूसरे हाथ से अपनी चूत सहलाने लगी। दस मिनट तक ऐसा करने के बाद मुझे लगा कि मेरी चूत से कुछ निकल रहा है। मैंने एक बार जोर से चूत को रगड़ लगाई और मुझे लगा कि मेरी चूत से कोई द्रव निकला और मैं शांत हो गई।

मुझे मज़ा आ गया !

अब तो मुझे रोज की राह मिल गई अभिषेक के जाने के बाद मैं उसके कमरे में जाती, उसका कोई सा भी जांघिया लेती, उसे सूंघती, उत्तजित हो जाती, चूत को सहलाती-मसलती और स्खलित हो जाती।

एक परिवर्तन मुझमें और आ गया था, पहले मुझमें अपने शरीर को लेकर काफी संकोच था, मैं अपने शरीर को काफी छुपा कर रखती थी लेकिन जीजू से चुदाई के बाद मेरे मन में यह लगने लगा कि ज्यादा से ज्यादा लोंडे मेरे शरीर को देखें, इसलिए मैंने अपने पहनावे में भी बदलाव कर दिया। अब मैं एसे कपड़े ज्यादा पहन कर निकलने लगी जिसमें मेरे शरीर का एक एक उभार दिख सके।

जीजू के साथ शादी हुई

मेरा नाम मुक्ता है, आज मैं आपको अपने जीजू के साथ की पहली चुदाई की बात बता रही हूँ। मेरी दीदी की जब शादी हुई तब मैं 18 साल की थी पर 18 साल की उम्र में मेरे वक्ष पके आम की तरह हो गए थे, चूतड़ उभर गए थे और उनकी दरार क़यामत ढाने लगी थी।

मेरे जीजाजी विपुल काफी खूबसूरत और लम्बे तगड़े थे, हमारे यहाँ यह समझा जाता है कि अगर जीजा थोड़ा बहुत अपनी साली के साथ मस्ती कर ले तो उसका बुरा नहीं मानना चाहिए। यही कारण ही है कि कोई भी जीजू सबसे पहले अपनी साली को चोदने की कोशिशों में लगा रहता है। मैं भी यही सोचती थी कि अगर विपुल ने कभी मेरे साथ जबरदस्ती की तो चूचियाँ तो मैं दबवा लूंगी, साथ में चुम्बन वगैरा का भी बुरा नहीं मानूंगी।

विपुल जीजू ने कुछ ऐसा ही मेरे साथ किया, वो जब भी अकेले में मेरे से मिलते तो कभी मेरी बोबे कस कर दबा देते, कभी गांड को सहलाने लगते, हौले-हौले सहलाते, फिर एकदम गांड की दरार में ऊँगली कर देते। चुम्बन की तो कोई सीमा ही नहीं थी, मेरे होंटों को चूम-चूम कर वो सुजा देते। हालांकि इससे मेरी चूत गीली हो जाती थी और मेरे चूचे तन जाते थे लेकिन मैं इसे जीजा का साली के प्रति प्यार समझ कर टाल देती थी।

लेकिन मुझे पता नहीं था कि मेरे द्वारा दी जाने वाली आज़ादी का जीजू गलत मतलब निकल रहे हैं और वो अब मुझे चोदने की योजना भी बना चुके हैं। जीजू जब भी ससुराल आते तो उनकी जीजी के साथ अलग कमरे में सोने की हसरत पूरी की जाती लेकिन इस बार जब वो आये तो वो हौले से मेरे से बोले- आज रात को कमरे में आ जाना, बात करेंगे।

रात को जीजी, जीजू और मैं कमरे में काफी देर तक बाते करते रहे। बारह बजे के लगभग जीजी बोली- मुझे नींद आ रही है, मैं सो रही हूँ।

जीजू और मैं ताश खेलते रहे, थोड़ी देर में जीजी गहरी नींद में सो गई। तब अचानक जीजू उठे और उन्होंने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और अपने होंठ मेरे होंठों से मिला दिए और उन्हें बेरहमी से चूसने लगे। यही नहीं, जीजू ने अपना एक हाथ मेरी छातियों पर रख दिया और दूसरे हाथ से मेरे चूतड़ों को मसलना शुरू कर दिया। मैं हतप्रभ रह गई कि यह क्या हो रहा है।

जीजू कहने लगे- मेरी जान ! कब से इस मौके का इंतजार कर रहा हूँ, आज मैंने तुम्हारी दीदी को नींद की गोलियाँ दे दी हैं और वो सुबह तक नहीं उठेगी।

उनकी बात सुनकर मेरे होश उड़ गए, मैं समझ गई कि आज जीजू अपनी मनमानी करके ही मानेंगे।

इधर जीजू ने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और उन्हें चूसने लगे, उनका एक हाथ मेरे बोबों को मसल ही रहा था और दूसरा हाथ मेरी गांड को सहला रहा था।

मेरी छातियाँ एकदम तन गई थी और मेरी चूत से पानी सा निकल रहा था। असल में मैं चुदाई के बारे में बिल्कुल नहीं जानती थी, मैंने केवल पुरुषों को आपस में गालियाँ देते हुआ सुना था जिसमें वो कहा करते थे- तेरी माँ को चोदूँ ! तेरी बहन को चोदूँ ! तेरी बीवी की चूत में मेरा लौड़ा !

अब इतनी नासमझ तो मैं भी नहीं थी, यह तो समझ गई थी कि चूत मेरे पास है और लौड़ा जीजू के पास ! और अब जो भी कहानी बनेगी वो इनसे ही बनेगी।

जीजू ने मुझसे कहा- अपनी कमीज उतार दे !

Desi Gil Jisha Junior Advocate Girl Sucking Her Boss Penis

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Booby Manju bhabhi sucking fingered BJ and fucking inside car (Dont Miss this one)

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